जब मैं बुरहान के घर पहुंचा…

buhranकुछ दिन पहले मैं एक डिग्री कॉलेज के आमंत्रण पर कश्मीर गया था. वहां टीवी चैनल के पत्रकारों ने मुझे त्राल जाने की सलाह दी थी. त्राल साउथ कश्मीर का वो मशहूर नाम है, जो शोपियां के बाद सबसे ज्यादा लिया जाता है. त्राल बुरहान वानी के इलाक़े के नाम से भी जाना जाता है. वानी यहीं का था. 2016 में बुरहान वानी के जनाज़े में 5 लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए थे. बुरहान इस क्षेत्र में बहुत लोकप्रिय था. स्थानीय लोग उसे अपने दुखों के खिलाफ लड़ने वाला सिपाही मानते थे. त्राल के रास्ते में मुझे बंकर दिखे, सेना के सिपाही दिखे. लोग बे़खौ़फ घूमते दिखे. हालांकि, मुझे श्रीनगर में कहा गया कि मैं त्राल संभल कर जाऊं और वहां से 5 बजे तक वापस आ जाऊं. बुरहान वानी के नाम और इन डरावनी चेतावनियों की वजह से मेरे अन्दर के दुस्साहस ने मुझे निडर बना दिया. मैंने तय किया कि मैं सबसे पहले बुरहान वानी के घर जाउंगा.

बुरहान वानी का घर त्राल की शुरुआत में ही है. बुरहान के पिता अपने घर के लॉन में अकेले बैठे थे. उनसे परिचय हुआ, धीरे-धीर बातचीत शुरू हुई. मैं बिल्कुल खामोश था और वे बोल रहे थे. उनके दो बेटों की बलि चढ़ गई. उन्होंने बताया कि किस तरह से नौजवान मिलिटेंसी की तरफ आकर्षित होते हैं. वे जो देखते हैं, महसूस करते हैं और जब उन्हें उसका कोई नतीजा नहीं मिलता, तो हाथ में बन्दूक़ लेकर मौत को गले लगाने निकल प़डते हैं.

बुरहान वानी के घर में गांव की औरतें, मर्द बर्तन लेकर पानी भरने आ रहे थे. मैंने पूछा क्या गांव में पानी नहीं आता या स़िर्फ आपके घर में ही नल है. तब बुरहान वानी के पिता ने बताया कि यहां पर एक चश्मा है, जो शायद हज़ारों साल से है. वहां से अनवरत पानी आता रहता है. उसमें कैल्शियम की मात्रा ज्यादा है. इसलिए इलाक़े के लोग उस चश्मे से पानी भरते हैं. मुझे वहां सिख धर्म के लोग भी पानी भरते दिखे. वो त्राल में ही रहते हैं और स्थानीय आबादी के साथ रच-बस गए हैं. स्थानीय लोगों ने और खास कर सिख धर्म के लोगों ने बुरहान वानी के स्वभाव की का़फी तारी़फ की. तब मुझे समझ आया कि शायद बुरहान वानी का व्यवहार, शरीर की भाषा का ही असर रहा होगा कि उसकी शवयात्रा में 5 लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए. बुरहान वानी के भाई खालिद का भी इन्काउंटर हुआ था. जब मैंने बुरहान वानी के पिता से बुरहान और खालिद के इन्काउंटर के बारे में पूछा तो वे खामोश हो गए

मैंने फिर त्राल के और लोगों से जानकारी ली तो पता चला कि बुरहान वानी 2010 में ही मिलिटेंसी में शामिल हो गया था. उसका भाई खालिद एक बार उससे मिलने पहाड़ों में गया, जिसे लौटते हुए सुरक्षाबलों ने पकड़ लिया और जब पता चला कि ये बुरहान का भाई है तो उसे मारा-पीटा और कहा कि हमें वहां ले चलो जहां बुरहान है. खालिद सुरक्षाबलों को लेकर उस जगह गया, लेकिन तब तक बुरहान वानी वहां से जा चुका था. स्थानीय लोगों के अनुसार, खालिद के सिर के पिछले हिस्से पर ज़ोर से राइफल के बट से प्रहार किया गया. खालिद ने जैसे ही हाथ पीछे किए, उसे ज़मीन पर गिरा कर सारे दांत तोड़ दिए गए. लोगों ने बताया कि उसके शरीर पर कोई निशान नहीं था, मुंह पर पट्‌टी बंधी थी, सिर्फ नाक दिखाई दे रही थी, क्योंकि उसके सारे दांत शायद पैर की ठोकर से या राइफल की बट से तोड़ दिए गए थे. लोगों ने बताया कि बुरहान वानी के पुलिस के साथ कोई इन्काउंटर उनकी जानकारी में नहीं हुई.

बुरहान वानी की मौत के बारे में भी स्थानीय लोगों ने एक घटना बताई. बुरहान वानी को ये पता चला कि सुरक्षाबल अमरनाथ यात्रा पर आने वाले लोगों पर हमले की योजना बना रहे हैं, इससे बुरहान वानी परेशान हो गया. उसने त्राल के अपने दो सम्पर्क सूत्रों से कहा कि वे उसकी बातचीत त्राल के विधायक से कराएं. वे लोग विधायक के पास गए. विधायक ने बुरहान वानी से बातचीत की. बुरहान वानी ने उनसे कहा कि हमलोग कभी भी अमरनाथ यात्रियों पर हमला नहीं करेंगे, लेकिन हमारे नाम पर कुछ लोग हमला कर सकते है. विधायक ने फौरन वहीं से महबूबा मुफ्ती को फोन मिलाया और उनसे मिलने की इजाज़त मांगी. महबूबा मुफ्ती ने उन्हें फौरन बुला लिया. विधायक डे़ढ घंटे के भीतर पहुंचे और महबूबा मुफ्ती को सारी बात बताई. महबूबा मुफ्ती ने डीजीपी को बुलाया और सारी जानकारी दी. डीजीपी वहां से निकल कर गए और एमएलए त्राल का फोन निगरानी पर (सर्विलांस) लगा दिया. उससे पता चला कि किन दो लड़कों के फोन से एमएलए को फोन जा रहा है. उन्हें पकड़ लिया गया. उन दोनों लड़कों को थर्ड डिग्री दी गई. उनसे कहा गया कि पुलिस फोर्स को लेकर वहां चलो, जहां बुरहान वानी के होने की संभावना है. स्थानीय पुलिस को पता नहीं चला और डीजीपी के निर्देश पर एक स्पेशल टास्क फोर्स ने वहां छापा मारा और बुरहान वानी का इन्काउंटर हो गया. इन क़िस्सों में कितनी सच्चाई है, मैं नहीं जानता. लेकिन ये दोनों क़िस्से ऐसे हैं, जो त्राल के हर आदमी की ज़ुबान पर हैं. त्राल और शोपियां मिलिटेंसी के बड़े केंद्र हैं और यहां आर्मी का मूवमेंट भी बहुत ज्यादा है.

Comments: Leave a Comment

Leave a Reply