इनसे मिलिए संतोष भारतीय

प्रभात ख़बर : रांची 7 दिसम्बर 1989

मृदुभाषी, परिस्थियों से समझौता करने में माहिर, रंग मिजाज और रविवार पत्रिका के पूर्व विशेष प्रतिनिधि तथा दिल्ली से प्रकाशित होने वाले साप्ताहिक अखबार चौथी दुनिया के संपादक संतोष भारतीय जनता दल की टिकट पर फर्रूखाबाद से चुनाव जीतकर इस बार संसद पहुंचे हैं। भले ही श्री भारतीय के लिए संसद नयीं है, लेकिन वहां बैठने वाले उनके लिए नये नहीं हैं। शुरू में श्री भारतीय जयप्रकाश आंदोलन में काफी सक्रिय रहे। जयप्रकाश नारायण, चंद्रशेखर, महावीर भाई आदि से उनके बहुत मधुर संबंध थे। जे.पी. आंदोलन के समय जेल की हवा खा चुके श्री भारतीय जोड़-तोड़ की राजनीति में काफी माहिर हैं। कोई चाहे इनसे कितना भी नाराज क्यों न हो, उसे मनाने में इन्हें समय नहीं लगता। लोगों से संपर्क बनाना तो कोई इनसे ही सीखे।

चौथी दुनिया के प्रकाशन के साथ-साथ ये वी.पी. सिंह के काफी करीब पहुंच गये। देवीलाल का भी इन पर वरदहस्त है। इलाहाबाद के चुनाव में तो ये परोक्ष रुप से विश्वनाथ प्रताप सिंह की चुनाव कमान ही संभाले हुए थे। चुनाव के समय इन्होंने कुछ ऐसे सुझाव भी दिये, जिसे राजा जी को मानना पड़ा।

मसलन चुनाव में पोस्टर छपवाना और गाड़ियों से प्रचार करवाना। उल्लेखनीय है कि वी.पी.सिंह ने इलाहाबाद के चुनाव से पहले यह घोषणा की थी कि वह चुनाव में प्रचार के दौरान न तो पोस्टर का प्रयोग करेंगे न गाड़ियों का। बीच में श्री संतोष भारतीय राज्यसभा के सदस्य बनते बनते रह गये। सबकुछ ठीक हो गया था। वी.पी.सिंह भी मान गये थे, लेकिन बुरा हो रामधन जी का कि उन्होंने ऐन वक्त पर लंगड़ी मार दी और भारतीय जी राज्यसभा के सदस्य नहीं बन सके। लेकिन इस बार उन्हें टिकट लेने और जीत आने से कोई रोक नहीं पाया। अगर श्री भारतीय मंत्री भी बन जायें तो कोई आश्चर्य नहीं। भले ही कुछ दिन बाद ही सही, लेकिन मंत्री बनने की काफी उम्मीद है।

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