तीसरा विश्वयुद्ध हुआ तो भारत भी सुरक्षित नहीं

नॉर्थ कोरिया-अमेरिका विवादः साउथ चाइना सी से संतोष भारतीय की ग्राउंड रिपोर्ट

मैं उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच झगड़े को लेकर उत्तर कोरिया, दक्षिण कोरिया, जापान, सिंगापुर और चीन के लोगों के मन की बात जानने की कोशिश कर रहा था. मैं ये सारी बातें साउथ चाइना सी से लिख रहा हूं, क्योंकि मुझे उत्तर कोरिया जाने की इजाजत नहीं मिली. इस दौरान मेरी उन देशों के नागरिकों से कई मौकों पर बातचीत हुई. उन लोगों ने मुझे जो बताया, वो बातें मेरी लिए काफी आश्चर्यजनक थीं. मेरी साउथ कोरिया, नॉर्थ कोरिया, चीन, सिंगापुर और जापान के लोगों और डिफेन्स एक्सपर्ट से भी बातचीत हुई. मैं साउथ चाइना सी तक गया. इसी बातचीत और यात्रा के आधार पर ये रिपोर्ट तैयार की गई है.


north koreaसाउथ कोरिया के लोगों ने कहा कि वे शांति चाहते हैं. वे नहीं चाहते हैं कि युद्ध हो. ये बात उन्होंने अपना नाम जाहिर नहीं होने की शर्त पर बताई. उनका कहना है कि हम अपने जीवन के इन क्षणों को, इन लम्हों को जीना चाहते हैं. हम नहीं चाहते कि किसी भी तरह के राजनीतिक विवाद में पड़ें. वहां के आदमियों और औरतों दोनों की एक ही मानसिक स्थिति है कि वो शांति चाहते हैं, वो युद्ध नहीं चाहते. हालांकि वे अमेरिका के राष्ट्रपति से गुस्सा हैं, क्रोधित हैं, लेकिन वे इस पर कुछ कहना नहीं चाहते हैं. उनका कहना है कि जब तक जिंदगी है, तब तक खुल कर और खुश होकर जीयो. जब मैंने पूछा कि उत्तर कोरिया के लोग आपके बारे में क्या सोचते होंगे, तो उन्होंने कहा कि 60 साल पहले हम एक-दूसरे के संपर्क में थे, लेकिन अब 60 वर्षों से हम अलग हैं. हमारे नौजवान बच्चे जब कभी विदेश जाते हैं, तो कभी आपस में उनकी मुलाकात हो जाती है, पर उनका अब कोई बहुत दिली लगाव नहीं है. लेकिन वो यह नहीं मानते कि उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन कोई बहुत जुनूनी आदमी हैं. उनका मानना है कि उन्हें बहुत परेशान किया जा रहा है और जापान उन्हें बहुत परेशान कर रहा है.

साउथ चाइना सी बनेगा युद्ध का अखाड़ा

जापान के लोगों से भी बातचीत हुई. वे यह कह रहे हैं कि उत्तर कोरिया उनके देश के लिए एक बड़ा खतरा बनकर खड़ा है. अगर उत्तर कोरिया को कंट्रोल नहीं किया गया, तो उनका देश कभी भी रसातल में जा सकता है. चीन के लोग इस मसले पर सिर्फ मुस्कराते हैं. हालांकि वो जानते हैं कि जब युद्ध हुआ तो जापान और दक्षिण कोरिया, उत्तर कोरिया के साथ-साथ वे भी लड़ाई के दायरे में आ सकते हैं. अगर बम चले, युद्ध हुआ तो जिसे हम इंडियन ओसन कहते हैं या जिसको साउथ चाइना सी कहते हैं, ये युद्ध के बड़े अखाड़े होंगे. यहां पर मिसाइल भी दागी जाएंगी, युद्धपोत भी आएंगे, लेकिन कोई भी युद्ध नहीं चाहता है.

 आग कौन भड़का रहा है

उत्तर कोरिया के सिर्फ एक आदमी से बड़ी मुश्किल से बात हो पाई. उसने बात की, पर पहले कहा कि आप कागज और कलम हाथ में नहीं लीजिएगा. उसने कहा कि हम लड़ाई नहीं चाहते, लेकिन कोई है, जो आग भड़का रहा है. आग कौन भड़का रहा है, यह पूछे जाने पर उसने स्पष्ट कहा कि अमेरिका. सबसे बड़ी बात, जो उसने कही कि हमारे यहां लोग साउथ कोरिया के लोगों जैसे सुखी नहीं हैं, लेकिन हम भूखे नहीं मर रहे हैं. हमारे यहां परेशानियां हैं, लेकिन हम भूखे नहीं हैं. हमारे राष्ट्राध्यक्ष किम जोंग उन खोज में लगे वैज्ञानिकों की खूब मदद करते हैं. देश की सुरक्षा के लिए हथियारों की खोज में लगे वैज्ञानिकों के लिए यहां सभी साधन मौजूद हैं. लेकिन उनके मन में ये बात जरूर है कि किसी भी तरह उनके देश का जीवन स्तर थोड़ा ऊंचा हो सके. यहां के लोगों को ये भी नहीं लगता कि युद्ध होगा. उन्हें ये भी लगता है कि युद्ध होगा, तो हम कैसे रोक सकते हैं? हम तो सामान्य नागरिक हैं. युद्ध अगर रोकना है तो वो अमेरिका और किम जोंग उन के हाथ में है. साउथ कोरिया के हाथ में भी नहीं है. हालांकि साउथ कोरिया और जापान इसके पहले शिकार होने वाला हैं.

जब युद्ध होगा, तब देखा जाएगा 

राष्ट्रपति ट्रम्प का कोई ठिकाना नहीं है कि वे कब, क्या कर बैठें? हो सकता है, फैसला भी ले लें कि उत्तर कोरिया के ऊपर बमबारी नहीं करनी है. पर मुझे लगता है कि उत्तर कोरिया को कहीं न कहीं अमेरिका से जानकारी मिल रही है कि अमेरिका ये करेगा और उसके पहले ही एक बम जापान के ऊपर और एक बम दक्षिण कोरिया के ऊपर डाल देगा. मैं सूत्र नहीं बता सकता, लेकिन मेरे ऊपर की बातचीत से ये छाप पड़ी है. इस क्षेत्र के लोग, जो अब धमकियों सेे उकता चुके हैं, का कहना है कि जब युद्ध होगा, तब देखा जाएगा. अभी तो जीयो, खाओ और जमकर शैंपेन पीओ. मेरा ख्याल है कि यह पूरा नॉनवेज इलाका है और सीफूड इनका प्रिय भोजन है. ये लोग इस समय खाने-पीने और जीने में लगे हुए हैं.

 द. कोरिया सेना की कमांड अमेरिकी हाथों में

एक नई चीज पता चली कि साउथ कोरिया की पूरी सेनाओं का कमांड अमेरिका के पास है. साउथ कोरिया में बहुत हलचल मच रही है कि ये कमांड उनके पास क्यों है? सांग मू यंग वहां के रक्षा मंत्री हैं. उन्होंने ये कहा है कि आप निश्चिंत रहिए. हम यूनीफाइड कमांड, जिसके अंतर्गत साउथ कोरिया की सेनाएं हैं, जिसे ओपीसीओएन कहते हैं, उनसे वार टाइम ऑपरेशन कंट्रोल जल्द लेने वाले हैं. उन्होंने ये भी कहा कि हमारे प्रेसिडेंट मून जो-इन लगातार कोशिश कर रहे हैं और जल्दी ही कंट्रोल हमारे पास आ जाएगा. अब ये जो नई चीज पता चली है कि साउथ कोरिया और नॉर्थ कोरिया के जो रिश्ते हैं, उसमें अमेरिका ने साउथ कोरिया से डिप्लोमैटिक सॉल्यूशन का ऑप्शन छीन लिया है. डिप्लोमेटिक ऑप्शन छीन जाने से अब ये लड़ाई साउथ कोरिया और नॉर्थ कोरिया के बीच न होकर, अमेरिका और नॉर्थ कोरिया के बीच हो गई है.

मेरी एक नॉर्थ ईस्टर्न एशियन डिफेंस एक्सपर्ट से बातचीत हुई. उन्होंने कहा कि अब यह अमेरिका की सुरक्षा का मसला बन गया है, इसलिए अमेरिका ने सारा कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया है. मौजूदा प्रेसिडेंट ट्रम्प इन चीजों को हाथ में लेकर अपने दिमाग से इसका हल निकालने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन साउथ कोरिया की जनता लड़ाई नहीं चाहती है और इसके लिए वहां प्रेशर बनाए हुए है. इसीलिए शायद प्रेसिडेंट मून जो-इन कोशिश कर रहे हैं कि उनके कमांड की सेना उनके हाथ आ जाए. दूसरी तरफ नॉर्थ कोरिया के पास बैलिस्टिक मिसाइल और शक्तिशाली बम हैं. लेकिन अभी तक अमेरिका और साउथ कोरिया को यह पता नहीं है कि उन्होंने जो बैलिस्टिक मिसाइल बनाई है, वह युद्धक बम या हाइड्रोजन बम को अमेरिका तक ले जाने में सक्षम है या नहीं. अमेरिका को ये डर है कि नॉर्थ कोरिया ने अगर किसी दिन उनपर हमला शुरू कर दिया, तब क्या करेंगे? दूसरी तरफ एक्सपट्‌र्स का ये भी कहना है कि चूंकि प्रेसिडेंट ट्रम्प अमेरिका के टॉप ट्‌वन्टी बिजनेसमैन में से रह चुके हैं, तो वे कभी भी इस हद तक नहीं जाएंगे कि दोनों में वार हो जाए.

इसके लिए उन्होंने मुझे एक उदाहरण भी दिया, उनका कहना है कि साउथ कोरिया की दो बड़ी कंपनियां एलजी और सैमसंग हैं. इनका अमेरिकी ऑपरेशन बहुत बड़ा है और वो चाहते हैं कि अमेरिका में उनका ऑपरेशन और बढ़े. इसीलिए उन्होंने दबाव डाला कि होम अप्लायंस और सफाई की मशीनों पर एलजी 250 मिलियन और सैमसंग 300 मिलियन डॉलर वहां इनवेस्ट करे. इसके तहत सैमसंग इतना पैसा खर्च कर अमेरिका में करीब 950 नौकरियां और एलजी 600 नए जॉब क्रिएट करेगा. प्रेसिडेंट ट्रम्प यह दबाव डाल रहे हैं कि दोनों कंपनियां अपने देश साउथ कोरिया पर दबाव डालें कि वो नॉर्थ कोरिया मसले को लेकर अमेरिकी रणनीति के ऊपर चलें.

 मॉक ड्रिल की मॉनिटरिंग कर रहे ट्रम्प

अमेरिका ने एक और खतरनाक काम किया. बी1बी दुनिया के सबसे खतरनाक बॉम्बर्स हैं. बी1बी बॉम्बर्स कई बार रात में उड़े और एक बार तो खुलेआम तैनात किए गए. जब ये बॉम्बर्स रात में उड़े, तब व्हाइट हाउस में बैठकर उनकी मॉनिटरिंग खुद प्रेसिडेंट ट्रम्प कर रहे थे कि वो कैसे उड़ते हैं, कहां जाते हैं और कैसे बम गिराएंगे? नॉर्थ कोरिया की सीमा को टच करके वो बॉम्बर्स लौट गए. इस बीच उन्होंने दूरी का आकलन कर लिया. ये चीजें इस क्षेत्र के लोगों और खासकर नॉर्थ ईस्टर्न एशियन डिफेंस एक्सपर्ट्स को खतरनाक लग रही हैं. वे अंदाजा कर रहे हैं कि पाकिस्तान में ओसामा बिन लादेन ऑपरेशन के पूर्व जो मॉक ड्रिल हुआ था, उसकी निगरानी व्हाइट हाउस में बैठकर खुद तत्कालीन प्रेसिडेंट ओबामा कर रहे थे. जब वे खुद मुतमईन हो गए, तब जाकर उन्होंने ग्रीन सिग्नल दिया था. इसके बाद  नेवी सील्स भेजे गए, जो पाकिस्तान में लादेन को मारकर डेड बॉडी के साथ वापस आ गए थे. ठीक वैसा ही काम अब प्रेसिडेंट ट्रम्प कर रहे हैं. वे व्हाइट हाउस में बैठकर बी1बी बॉम्बर्स के एक्सरसाइज को देखरहे हैं. एक सेकेंड में ये बॉम्बर्स कितनी दूरी पर और कितना बम गिराते हैं, इसे कैलकुलेट कर रहे हैं. ये अभी तक बहुत खुला हुआ नहीं है, लेकिन ऐसा हो रहा है.

 भारत भी सुरक्षित नहीं

जनता तो अपने अंदाज में मस्त है, लेकिन जो डिफेंस एक्सपट्‌र्स और पीस लवर्स हैं, वे बहुत चिंतित हैं. उनका ये कहना है कि अगर लड़ाई हुई तो समुद्र के जीव-जन्तु खत्म हो जाएंगे, जिंदगियां खत्म हो जाएंगी, देश खत्म हो जाएंगे. इसका असर सिर्फ चीन, नॉर्थ कोरिया, साउथ कोरिया या जापान तक ही नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर चीन के पड़ोसी देशों बर्मा, भारत और पाकिस्तान पर भी पड़ेगा. अगर इनके ऊपर असर पड़ता है, तो हम हिन्दुस्तानियों के पास तो कोई डिफेंस सिस्टम भी नहीं है. हमारे लोगों को तो यह तक पता नहीं है कि प्रदूषित हवा को हम अंदर जाने से कैसे रोक सकते हैं? यहां तो परमाणु अस्त्रों से निकले विषैले प्रभाव को रोकने की बात है. यह मानवता के ऊपर सबसे करारा हमला होगा, इसके बावजूद कुछ लोगों का मानना है कि चूंकि खुद ट्रंप बिजनेस मैन हैं, इसलिए वे इतनी दूर तक नहीं जाएंगे. लेकिन अमेरिका में प्रेसिडेंट की कुर्सी पर बैठा व्यक्ति, चाहे वो निक्सन हो या ट्रम्प, सिर्फ अमेरिकी हितों को देखता है. जो ताकतवर होता है, जिम्मेदारी तो उसी की होती है. जो कमजोर है, उसकी जिम्मेदारी नहीं होती है. कमजोर को तो लोग कहते हैं कि ये हमको उकसा रहा है, पर सचमुच वो कितना उकसा रहा है, कौन जानता है. चूंकि आरोप आपको लगाना है, तो आप किसी के ऊपर लगा दें. जैसे आपने सद्दाम के ऊपर आरोप लगा दिया था, लेकिन वहां तो कोई रासायनिक हथियार या मास डिस्ट्रक्शन वैपन्स नहीं मिले.

अब तो लोग कह रहे हैं कि साउथ कोरिया के हाथ से राजनीतिक हल निकालने का मसला दूर चला गया है. अब तो लोग ये कह रहे हैं कि संयुक्त राष्ट्रसंघ के, जो सबसे अच्छे और समझदार महासचिव बान की मून थे, अगर उनके हाथ में भी यह मसला दे दिया जाता, तो वे कुछ नहीं कर सकते थे. अब सिर्फ और सिर्फ ट्रम्प के हाथ में है. अगर ट्रम्प मानवता के बारे में कुछ सोचेंगे, तभी शायद स्थिति सामान्य हो सकती है, अन्यथा साउथ कोरिया और जापान के लोग  काफी चिंतित हैं. साउथ कोरिया के लोग, जिनके रिश्तेदार नॉर्थ कोरिया में हैं, उनको तो दोनों तरफ से मरना है. इसीलिए प्रेसिडेंट मून जो-इन पूरी कोशिश कर रहे हैं कि साउथ कोरिया के सेना की कमान वे अमेरिका के हाथों से अपने हाथ में ले लें, देखें ये हो पाता है या नहीं.

 उ. कोरिया के उकसावे का जवाब है युद्धाभ्यास

साउथ कोरिया के प्रेसिडेंट मून जो-इन वियतनाम और इंडोनेशिया की यात्रा पर जा रहे हैं. वे शायद नॉर्थ कोरिया के सवाल पर इन राष्ट्राध्यक्षों का अपने लिए समर्थन हासिल करने जा रहे हैं. दूसरी तरफ अमेरिका के प्रेसिडेंट ट्रम्प जापान और साउथ कोरिया आ रहे हैं. वे साउथ कोरिया इसलिए आ रहे हैं, ताकि फाइनल व्यू ले सकें कि क्या करना है? लेकिन उनके आने से पहले बहुत कुछ शुरू हो गया है. न्यूक्लियर वैपन से लैस वारशिप यूएसएस रोनाल्ड रीगन साउथ कोरिया की समुद्री सीमा में पहुंच गया है. यह पांच दिनों के लिए होने वाले युद्धाभ्यास में हिस्सा लेगा. अमेरिका और साउथ कोरिया मिलकर पांच दिनों का युद्धाभ्यास ईस्ट और यैलो सी में कर रहे हैं. नॉर्थ कोरिया के उकसावे का जवाब देने के लिए यह एक्सरसाइज हो रही है, लेकिन यह एक्सरसाइज नहीं है. यह दरअसल नॉर्थ कोरिया के खिलाफ समुद्री लड़ाई का प्रैक्टिकल या पूर्वाभ्यास है. नॉर्थ कोरिया को अगर दबाना हो या उस पर हमला करना हो, तो कैसे किया जाए, उसकी रणनीति इस अभ्यास में बनेगी.

यूएसएस रोनाल्ड रीगन साउथ कोरिया की समुद्री सीमा में पहुंच गया है. इस ड्रिल का नाम है मैरी टाइम काउंटर स्पेशल ऑपरेशन्स फोर्स या एमसीएसओएफ. रोनाल्ड रीगन 1092 फीट लंबा है. इसकी वाटर लाइन बीम 134 फीट है और फ्लाई डेक 252 फीट चौड़ी है. यह 60 फाइटर्स हवाई जहाज को कैरी कर सकता है और इस यूएसएस रोनाल्ड रीगन पर पांच हजार क्रू मेंबर्स भी मौजूद हैं. यूएसएस मिशीगन एक पनडुब्बी है, जो ओहियो क्लास गाइडेड मिसाइल से लैस है. ये भी एमसीएसओएफ ड्रिल में हिस्सा लेने पहुंच चुकी है. ये भी 170.6 मीटर लंबी और 12.8 मीटर चौड़ी है. इसका मतलब 560 फीट लंबी और 42 फीट चौड़ी है. इसपर 150 टॉम हॉक क्रूज मिसाइल लदे हुए हैं, जो 1240 मील तक मार कर सकते हैं. दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री ने इस पनडुब्बी की सैर की और ये भी कहा कि नॉर्थ कोरिया की राजधानी प्योंग योंग को ये उनका जवाब है. नॉर्थ कोरिया इस ड्रिल का विरोध कर रहा है. नॉर्थ कोरिया कह रहा है कि अमेरिका और साउथ कोरिया की कार्रवाई इसलिए हो रही है, ताकि वो उन तत्वों को बढ़ावा दे सकें, जो नॉर्थ कोरिया में सत्ता पलटना चाहते हैं. किम जोंग उन को डर है कि इस एक्सरसाइज से उन लोगों को बल मिलेगा, जो उनके खिलाफ हैं. ये उसे अपनी सत्ता से हटाने का अभियान मानते हैं. ये भी पता चला है कि नॉर्थ कोरिया ने अपने सभी मालवाहक जहाजों को मिसाइल लॉन्चर में तब्दील कर दिया है.

ट्रम्प की धमकी

शायद नॉर्थ कोरिया फिर मिसाइल टेस्ट करे. वो इसलिए कि चीन की पीपुल्स पार्टी की 10वीं पार्टी कांग्रेस में प्रेसिडेंट जिन पिंग को अगले पांच साल के लिए फिर प्रेसिडेंट चुन लिया जाएगा. इसलिए अंदाज है कि शायद उसी दिन नॉर्थ कोरिया फिर से अपनी बैलिस्टिक मिसाइल का टेस्ट करेगा. इस टेस्ट को अमेरिका उकसावे की कार्रवाई मानेगा और इसके बाद शायद नॉर्थ कोरिया के ऊपर वो और कार्रवाई करे. ट्रम्प ने एक बात कही कि जब हम किसी से समझौते की बात करते हैं, तो उसका कोई न कोई नतीजा जरूर निकलता है और अगर वो नतीजा न निकले तो हम फिर वो करते हैं, जो कभी हुआ ही नहीं है. ये ट्रम्प के शब्द याद रखिए. इसका मतलब आप निकाल सकते हैं. पहले अंदाज था कि 10 अक्टूबर को ये टेस्ट होगा, क्योंकि उस दिन प्योंग योंग में वर्कर्स पार्टी का 72 वीं स्थापना दिन मनाया गया था. रूल करने वाली वर्कर्स पार्टी किम जोंग उन की फादर की पार्टी है. 10 अक्टूबर को तो कुछ नहीं हुआ, लेकिन उम्मीद थी कि चीन की दसवीं कांग्रेस की शुरुआत में नॉर्थ कोरिया बैलिस्टिक मिसाइल का प्रयोग या उसका परीक्षण करेगा. अब ये पांच या दस दिन में टारगेट अटैक रडार सिस्टम पर होगा. नॉर्थ कोरिया के रडार सिस्टम को टारगेट करके ये अभ्यास शुरू होगा. यूएस आर्मी और एअर फोर्स का ये ज्वाइंट प्रोजेक्ट है. नॉर्थ कोरिया के टोटल कम्युनिकेशन सिस्टम स्पेशली रडार को कैसे जाम करना है, कैसे ध्वस्त करना है. अब वहां पर क्या-क्या पहुंच गया है, वो भी आपको बता दें. एफ 202 रॉप्लेट, ए 10 थंडर वोल्ट टू, सी 17 ग्लोब मास्टर थर्ड, सी130 जे हरकलिस, बी1बी लेंसर, केसी 135 स्टैटो टैंकर, इ 3 सेंट्रे, यू 2 ड्रैगन लेडी, आरक्यू 4 ग्रोवल हॉक, इस अभ्यास में हिस्सा लेंगे. किसको, कौन, कहां से, कैसे हमले करेगा और नॉर्थ कोरिया को कैसे जाम करना है, कैसे घुसना है, उसकी रणनीति बनेगी. एयरफोर्स का फिफ्थ जनरेशन फाइटर एफ 35ए लाइट टू भी इसमें शामिल है, जो न्यूक्लियर वैपन ले जाने वाले मिसाइल से लैस है.

 अमेरिका देगा न्यूक्लियर अम्ब्रेला का प्रोटेक्श्न

दरअसल प्रेसिडेंट ट्रम्प जापान और साउथ कोरिया को ये आश्वासन देने आ रहे हैं कि लड़ाई की स्थिति में वे दोनों देशों को न्यूक्लियर अम्ब्रेला का प्रोटेक्शन देंगे. जापान बहुत डरा हुआ है. जापान के पास अपनी सेना नहीं है, जो लड़ाई कर सके. साउथ कोरिया के पास भी नॉर्थ कोरिया का सख्ती से मुकाबला करने के लिए सेना नहीं है. नॉर्थ कोरिया ने अपनी ताकत बहुत बढ़ा ली है. जैसा मैंने बताया था कि साउथ कोरिया के प्रेसिडेंट मून जो-इन नहीं चाहते कि लड़ाई हो. इसलिए वो अपनी सेना का कमांड अपने हाथ में लेना चाहते हैं, लेकिन वो ऐसा कर नहीं पा रहे हैं. उनके रक्षामंत्री इस दबाव को झेल नहीं पा रहे हैं. वे युनाइटेड स्टेट आर्मी के साथ और खासकर उनकी जो मिसाइलों से लैस नई पनडुब्बी आई है, जो 1240 मील तक की मार कर सकती है, को देखकर आए हैं. अब ये सारी स्थिति दिनों दिन बिगड़ती जा रही है. ये स्थिति लोगों की आकांक्षाओं के विपरीत है क्योंकि लोगों की इच्छा एक तरफ होती है और सत्ता की मर्जी बिल्कुल दूसरी होती है.

 नॉर्थ कोरिया से बौखलाया अमेरिका

अमेरिका के राष्ट्रपति, साउथ कोरिया के राष्ट्रपति हैं या उनके एलाइज, सभी सारी दुनिया में अपनी धमक दिखाना चाहते हैं. एक छोटा सा देश नॉर्थ कोरिया उनके सामने तनकर खड़ा है. हो सकता है नॉर्थ कोरिया की सारी गलती हो, उसने इतनी चिकोटी काटी हो कि अमेरिका को लग रहा होगा कि इसे अभी दबाना आवश्यक है, लेकिन ये मनोविज्ञान ठीक वैसा ही है कि गांव या शहर के किसी ताकतवर नेता को किसी साधारण वर्कर की सभा में अच्छा भाषण देना भी पसंद नहीं आता है. ये सामान्य मनोविज्ञान है. अगर किसी पार्टी के अध्यक्ष को ये लगे कि उनकी पार्टी में ये नेता धीरे-धीरे उभर रहा है, तो वो सबसे पहले उसकी राजनीतिक हत्या करता है. इसी तरह अंतरराष्ट्रीय शक्ति संतुलन है. वो देश जो सारी दुनिया में अपना दबदबा कायम करना चाहता है और ट्रम्प इस मौके को अपने ताकतवर होने का एहसास सारी दुनिया को दिलाना चाहते हैं कि वो ताकतवर भी हैं और जल्द फैसले भी ले सकते हैं. अब भी बहुतों को विश्वास है कि चूंकि ट्रम्प बिजनेसमैन हैं, इसलिए ऐसा कोई फैसला शायद न लें. लेकिन जो ट्रम्प का मनोविज्ञान जानते हैं, जो उनके बयानों को देखते हैं, जिस तरह से ट्रम्प लोगों की इज्जत या बेइज्जती करते हैं, वो सारी चीजें बताती थीं कि ट्रम्प ये सब कर सकते हैं. ट्रम्प ओबामा या अमेरिका के किसी भी राष्ट्रपति से बेहतर हैं या नहीं, ये तो इतिहास बताएगा. लेकिन अभी तो ऐसा लग रहा है कि ट्रम्प अपने को इतिहास का सबसे शक्तिशाली, सबसे समझदार और सबसे होशियार राष्ट्रपति साबित करने पर तुले हैं.

नॉर्थ कोरिया, साउथ कोरिया और अमेरिका के बीच का तनाव टॉप पर है और शायद कुछ भी हो सकता है. नॉर्थ कोरिया ने कहा है कि न्यूक्लियर वार में ब्रेक आउट एट ऐनी मूवमेंट हो सकता है और ये दुनिया में इस समय चिंता का विषय बना हुआ है. पर मैं आपको बता चुका हूं कि नॉर्थ कोरिया जल्द नई बैलिस्टिक मिसाइल का एक्सप्लोजन कर सकता है या टेस्ट कर सकता है. इसी समय यूएसएस रोनॉल्ड रीगन भी समुद्र में है, पर इससे पहले अभी की बातचीत सुन लीजिए. अमेरिका के सिक्युरिटी एडवाइजर जनरल एचआर मैकमास्टर ने कहा है कि हम वार के आप्शन पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं.

 ऑस्ट्रेलिया को नॉर्थ कोरिया की धमकी

अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट रैक्स टिलरसन ने कहा है कि पहला बम गिरने तक हम बातचीत करते रहेंगे और पॉलिटिकल सॉल्यूशन तलाशते रहेंगे. पर पूरे सेंटेन्स का कंस्ट्रक्शन देखिए. पहला बम गिरने तक ये खतरनाक सोच अमेरिका की है. ऑस्ट्रेलिया ने ट्रम्प का साथ देने का फैसला किया है. इसे लेकर नॉर्थ कोरिया ने ऑस्ट्रेलिया को बहुत धमकाया है कि आप अगर ये करते हैं तो आप भी हमारे दुश्मन माने जाएंगे. एक और बहुत महत्वपूर्ण चीज कि ट्रम्प हैनरी किसिंजर से मिले और लंबी बातचीत की. साउथ कोरिया के प्रेसिडेंट मून जो-इन भी हैनरी किसिंजर से मिलना चाहते हैं. इस बीच नॉर्थ कोरियन हैकर्स ने साउथ कोरिया की सबसे बड़ी ऑनलाइन करेंसी एक्सचेंज कंपनी वितुंब के 30 हजार यूजर्स रिकॉर्ड हैक कर लिए हैं. साउथ कोरिया के प्रेसिडेंट मून जो-इन ने 1994 में सिएटल में साउथ-नॉर्थ कोरिया विवाद के अमेरिकी चीफ निगोशिएटर गैल्युसी जे चीफ से भी मुलाकात की है. चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की कांग्रेस शुरू हुई, उसी समय साउथ कोरिया और यूएसके मैरी टाइम ड्रिल भी शुरू हुई. यूएसएस रोनॉल्ड रीगन और यूएसएस के बहुत सारे खतरनाक जहाज इसमें हिस्सा ले रहे हैं, जो उनके रडार सिस्टम को डैमेज करना चाहते हैं. एफ 202, ए10 थंडर वोल्ट 2, ये सब हवाई जहाज के नाम हैं. सी 17 ग्रुप मास्टर्स थर्ड, सी 130 जे हरकुलिस, बी1बी लैंसर, केसी 135 स्टैटो टैंकर, ई थ्री सैंट्री, यू 2 ड्रैगन लेडी, आर क्यू फोर ग्लोबल हॉक, इसमें हिस्सा ले रहे हैं. सबसे बड़ी चीज कि जो सबमैरीन है, जिसके ऊपर लगभग यूएसएस मिशीगन पनडुब्बी है, जो ओहयो क्लास गाइडेड मिसाइल लिए हुए है, ये भी इस ड्रिल में हिस्सा ले रहे हैं. यह 170.6 मीटर लंबी और 12.8 मीटर चौड़ी है. इसमें लगभग 150 टॉक हॉक क्रूज मिसाइल हैं और 60 हवाई जहाज हैं, जो 1240 मील तक मार कर सकते हैं. इस बीच सियोल में दुनिया भर के 39 शहरों के मेयरों की क्लाइमेेट चेंज को लेकर बातचीत हुई.

 अपने देश पर क़ब्ज़ा करने की साज़िश मान रहा नॉर्थ कोरिया

हमें पहले लग रहा था कि अमेरिका युद्ध के लिए तैयार नहीं है, लेकिन अमेरिका ने अंदर ही अंदर पूरी तैयारी कर रखी है. उसने अपनी सारी विध्वंसक शक्ति यैलो सी में इकट्‌ठी कर ली है. नॉर्थ कोरिया के हर स्ट्रैटजिक प्वाइंट इस समय उनकी जद में हैं. दूसरी तरफ नॉर्थ कोरिया कह रहा है कि हम इसे अपने देश पर कब्जा करने की साजिश मानेंगे और इसका जवाब देंगे. अमेरिका एक और नया काम कर रहा है. अमेरिका ईरान के साथ भी टेंशन ले रहा है. इस समय चीन, ईरान और नॉर्थ कोरिया एक नया ध्रुव बनता जा रहा है और शायद रूस भी इनके साथ शामिल हो जाए. क्योंकि अभी तक रूस का ऑफिशियल स्टैंड, न्यूट्रियल स्टैंड तो है लेकिन बहुत न्यूट्रियल नहीं है. ये दुनिया के लिए एक ऐसी तनाव भरी स्थिति होगी जिसमें चीन के साथ-साथ भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश भी इसकी जद में आ जाएंगे. अगर ईरान के साथ अमेरिका ने ज्यादा टेंशन लिया, तो ईरान भी इसमें शामिल हो सकता है. ऐसा लगता है कि सचमुच तीसरे विश्व युद्ध का समय आ रहा है. हम यही प्रार्थना करेंगे कि तीसरा विश्व युद्ध न हो.

Comments: 2 Comments

2 Responses to “तीसरा विश्वयुद्ध हुआ तो भारत भी सुरक्षित नहीं”

  1. Really a good article. Very accurate analysis.
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  2. Karan says:

    Nice sir ji

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