जनहित में चुनाव लड़ना मेरा फर्ज है – संतोष भारतीय
चौथी दुनिया : 5 से 11 नवंबर 1989 में प्रकाशित
उत्तर प्रदेश में फर्रूखाबाद संसदीय क्षेत्र से चौथी दुनिया साप्ताहिक के संपादक श्री संतोष भारतीय जनता दल के उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में हैं। श्री सलमान खुर्शीद कांग्रेस (आई) के उम्मीदवार के रूप में उनका सामना करेंगे। कहने को तो भाजपा के दयाराम शाक्य ने भी अपना पर्चा दाखिल किया था परंतु जद और भाजपा के बीच हुए समझौते में फर्रूखाबाद संसदीय क्षेत्र जनता दल के खाते में था इसलिए संभावना यह है कि संयुक्त विपक्ष के इकलौते उम्मीदवार के रूप में श्री संतोष भारतीय का मुकाबला इंका के सलमान खुर्शीद से ही होगा।
फर्रूखाबाद संसदीय क्षेत्र का इतिहास कुछ इस तरह है कि यहां का मतदाता मूलत: प्रतिपक्षी है और आजकल तो कांग्रेस की गिरती हुई साख और इंका के बहिसियाने रवैये से उबी हुयी जनता बदलाव का सपना देख रही है। जनता के सामने मुद्दा है कि वह ईमानदारी को चुने व बेमानी को, भ्रष्टाचार, अन्याय, महंगायी और पुलिसिया करतूतों के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर करे और इसके लिये उनके पास एक मात्र उम्मीद की तरह जनता दल प्रत्याशी ही है। इंका प्रत्याशी सलमान खुर्शीद के पिता खुर्शीद आलम यहां से पिछली बार संसद में चुन कर गये थे और जनता को उम्मीदें थी कि फर्रूखाबाद के पिछड़ेपन को दूर कर के विकसित करने में वह कुछ करेंगे परंतु यहां का विकास तो दूर संसद में पहुंचने के बाद और केन्द्रीय कैबिना में शामिल होने के बाद उन्हें फर्रूखाबाद की ओर मुड़ कर भी नहीं देखा और जो वहां पहुंचा उसे पहचाने से इंकार कर दिया और सत्ता की सीढ़ी चढ़ कर राज्यपाल बन गये। सत्ता के हस्तातंरण में परिवारवाद की मूल प्रवृति का अनुसरण करते हुए अपने पुत्र को इंका की टिकट दिलवा कर सत्ता की सीढ़ी पर चढाने के फर्ज का निर्वाह दिया। दूसरी ओर संतोष भारतीय फर्रूखाबाद जिले के गणेशपुर गांव के ही निवासी हैं और प्रखर समाजसेवी और सर्वोदयी कार्यकत्ता भैरों सिंह भारतीय के पुत्र हैं भैरों सिंह भारतीय आजादी की लड़ाई के एक ऐसे सिपाही थे जो देश की आजादी के लिये होने वाले संघर्ष में तो पूरी तरह जुटे रहे लेकिन आजादी मिलने के बाद उसके बदले में कभी कुछ नहीं चाहा। उनके सामने मुल्क पहले था जाति, धर्म और सांप्रदायिकता थी टुच्ची और घिनौनी कारीगरी से वे हमेशा दूर रहे। श्री संतोष भारतीय आज उन्हीं आदर्शों को लेकर वर्तमान सत्ता की घिनौनी साजिशों के विरुध्द एक फर्ज के रूप में चुनाव मैदान में उतरे हैं। सलमान खुर्शीद के यहां से चुनाव लड़ने का आधार यदि कुछ हैं तो सिर्फ यह कि इस चुनाव क्षेत्र में लगभग 90 हजार अल्प संख्यक मतदाता है। जिनकी इंका के शासनकाल में शोषित पीड़ित और पिछड़ा रहना नियति है। समूचे फर्रूखाबाद का विकास तो दरगुजर रहा मुस्लिम संप्रदाय के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए भी सलमान आलम और उनके पिता खुर्शीद आलम ने सत्ता में रहते हुए भी कोई ऐसा काम नहीं किया जिससे आज मेहनतकश मुसलमान को सही जिंदगी जीने का हक मिल सके। दूसरी जातियों में यहां कायमगंज क्षेत्र में कुर्मी (गंगवार) मतदाताओं की बहुत बड़ी संख्या है जहां से विगत विधानसभा चुनावों में सलमान आलम के भाई इंका के रियाज आलम को निर्दलीय राजेंद्र सिंह गंगवार ने पराजित कर दिया था। अब राजेंद्र सिंह गंगवार जनता दल में हैं और अपनी पूरी सक्रियता के साथ जनता दल के प्रचार और चुनाव कार्य से जुड़े हैं। कायमगंज में ही भाजपा का अच्छा प्रभाव रहा है। गिरीश तिवारी इस क्षेत्र से विधानसभा सदस्य रह चुकें हैं। इसके अतिरिक्त कायमगंज क्षेत्र से अहमद खां, कल्लू सिंह जनता दल के समर्थन में सक्रिय हैं। दूसरी ओर मोहम्बदाबाद के यादव बहुल इलाके में पिछली बार नरेंद्र सिंह यादव विधान सभा में इंका के टिकट पर पहुंचे थे परंतु अबके उन्हीं के परिवार के नजदीकी सुरेश यादव उसके विरूध्द एक विशाल जन समर्थन के साथ उठ खड़े हुये हैं। उससे आगे भौगांव विधान सभा क्षेत्र लगभग 70 हजार लोधी राजपूत मतदाता हैं, और यहां से भी पिछली बार इंका की टिकट पर सूबेदार सिंह विधान सभा में गये थे परंतु इन चुनावों में जन आक्रोश और विश्वनाथ प्रताप सिंह के उत्साह को देख कर वह पशोपेश में हैं क्योंकि यहां से उन्हीं के संरक्षक के पुत्र अश्विनी कुमार सिंह उनके विरूध्द आ डटे और श्री अश्विनी कुमार सिंह की छवि और साख काफी अच्छी है इसलिये यहां भी इंका अपनी डूबती हुई नाव को सिर्फ संसाधनों एवं अपराधों के बल पर ही खेना चाहती है जो जन उत्साह के कारण संभव नहीं है।
फर्रूखाबाद का यह संसदीय क्षेत्र हर तरह से पिछड़ा हुआ है। न यहां यातायात के अच्छे साधन हैं न टेलीफोन की सुविधा है न कोई औद्योगिक विकास है न कृषि उपज बढ़ाने के लिये सरकार ने कोई कदम उठाया है। इंका के सत्तारूढ़ नेता जनता को सत्ता की सीढ़ी समझ कर उपयोग करते रहे हैं। जनता दल प्रत्याशी संतोष भारतीय ने अपना नामांकन दाखिल करने के बाद अपने चुनाव अभियान की शुरूआत फर्रूखाबाद के मुस्लिम बहुल इलाके भीकमपुर से की। यह इलाका बहुत पिछड़ा हुआ है न यहां सड़कें है न पानी बिजली की आम सुविधाऐं। यहां के निवासी मुख्य रूप से मजदूर वर्ग के हैं जो छपाई के धंधे से जुड़े हुये हैं। इस सभा के आयोजकों में से श्री शगीर अहमद ने संतोष भारतीय का वहां की आम जनता से परिचय कराया और समर्थन का वादा करते हुये वहां के पिछड़ेपन का ब्यौरा दिया, साथ ही यह भी बताया कि संतोष भारतीय हिन्दुस्तान के उन अखबार नबीसों से हैं जिन्होंने हाशिमपुरा और मलियाना में सांप्रदायिक दंगे के दौरान पुलिस बर्बरता के खिलाफ सबसे पहले अपने साप्ताहिक अखबार चौथी दुनिया में आवाज बुलंद की। इसी सभा में श्री हशीन अहमद ने कांग्रेस की अपराधवृत्ति, फिरकापरस्ती और भ्रष्टाचार तथा मंहगाई का खुलाशा करते हुए आम मुसलमान से अपने विकास के लिए संघर्ष का आह्वान किया। और संघर्ष का पहला कदम उन्होंने कांग्रेस को पराजित करने का लक्ष्य कहा। इसी सभा में प्रखर और फतेहगढ़ के डी एन कॉलेज के प्रोफेसर डा.गौतम ने कहा कि आम जनता जाग चुकी है वह धर्म संप्रदाय के नाम पर अपने कीमती मत का उपयोग नहीं करेगी।
नेहरू परिवार की तरह खुर्शीद आलम का यह परिवारवाद जनता को अब स्वीकार नहीं हैं। श्री संतोष भारतीय ऐसे हर जन आंदोलन से जुड़े रहे हैं जो विघटनकारी शक्तियों के खिलाफ संघर्षरत रहा है। फर्रूखाबाद के ही जनता दल कार्यकत्ता श्री सतीश दीक्षित ने फर्रूखाबाद के गौरवमय इतिहास का हवाला देते हुये जनता से संतोष भारतीय को जिता कर बेईमानी और भ्रष्टाचार को हराने की अपील की।
अंत में जनता दल प्रत्याशी श्री संतोष भारतीय ने जनता के सवालों के जवाब देते हुये कहा कि मैं बहुत अदब के साथ यह कहना चाहता हूं कि एक पत्रकार के रूप में मेरठ के सांप्रदायिक दंगों में पुलिस की अमानवीयता के खिलाफ जो मैंने किया वह मेरा फर्ज था और यह चुनाव लड़ना भी मेरा एक फर्ज है क्योंकि यह लड़ाई सिर्फ संतोष भारतीय और सलमान खुर्शीद के बीच नहीं है, यहां मुल्क कसौटी पर है।
यह लड़ाई अन्याय के विरूध्द न्याय के लिए है ये भ्रष्टाचार और बेईमानी के विरूध्द ईमानदारी की लड़ाई है। ये सिपाहियों की जिंदगी के लिए लड़ाई है जिनका मौजूदा सरकार ने दलाली खा कर घटिया हथियार खरीदे है। यह मुल्क की सुरक्षा की लड़ाई है। इसलिए यदि इस चुनाव में फर्रूखाबाद की जनता अपनी चेतना का सही उपयोग कर सके और अपने विकास के प्रति चैतन्य हो सके तो यह बहुत बड़ा काम होगा।
मिर्जा देहलवीं