दिलचस्प होता नजर आ रहा है फर्रुखाबाद सीट का चुनाव अल्प संख्यक मतों का विभाजन होगा, सलमान को मुश्किल में डालेंगे साक्षी। सिपहसलाआरों के साथ छोड़ जाने से लोकसभा चुनाव में विदेश राज्य मंत्री सलमान खुर्शीद को पुन: विजय प्राप्त करना लोहे के चने चबाना जैसा प्रतीत होगा। साथ ही सपा से अल्पसंख्यकों के बुजुर्ग नेता अनवार मोहम्मद खां के चुनाव मैदान में उतर जाने से अल्पसंख्यक मतों के विभाजन को भी कोई रोक नहीं पाएगा। जिसका सीधा लाभ भाजपा प्रत्याशी मथुरा के सांसद स्वामी सच्चिदानन्द साक्षी को मिलता दिखाई दे रहा है। कुल मिलाकर फर्रुखाबाद लोकसभा चुनाव प्रतिष्ठापूर्ण होने के साथ काफी दिलचस्प होगा।
संसद में पहुंचने के लिए इस बार सारे राजनीतिक दल अपनी सारी शक्ति लगाकर करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाएंगे। धन-बल, जनबल एवं बाहुबल पर लड़े जाने वाले चुनावों में इस बार अगर जिला प्रशासन ने सूझबूझ का परिचय नहीं दिया तो खून खराबा भी हो सकता है। सभी राजनैतिक दलों के प्रत्याशियों ने जनता के दरबार में हाजिरी देना प्रारंभ कर दिया है। जनता अभी प्रत्याशियों को घास नहीं डाल रही है। प्रत्याशियों ने अपने कार्यकत्ताओं को जनता की नब्ज टटोलने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में भेजना प्रारंभ कर दिया है। ताकि जनता की भावनाओं को भड़का कर उसी तरह के लुभावने वायदे किए जाएं।
लोकसभा चुनावों चाहे कोई मुद्दा हावी हो न हो लेकिन जातिवादी मुद्दा अभी से हावी होता दिखाई दे रहा है। क्योंकि यह जातिगत राजनीति का ही परिणाम है भाजपा ने मथुरा के वर्तमान सांसद स्वामी साक्षी जी महाराज को फर्रुखाबाद लोकसभा सीट से उतारा है। ताकि लोधी समाज की मांग को ध्यान में रखते हुए लोधी समाज को खुश रखा जा सके और दोनों फर्रुखाबाद और कन्नौज लोकसभा सीट के भाजपा प्रत्याशियों को लोधी समाज का एक मुस्त समर्थन मिल सके। जातिवादी राजनीति का प्रबल विरोध करने वाली भाजपा ने इस ग्यारवीं लोकसभा चुनाव में जातिवाद को पूरी तरह भुनाया है। क्योंकि जिले में ठाकुर मतदाताओं को लुभाने के लिए भाजपा ने कन्नौज से ठाकुर प्रत्याशी व पूर्व विधायक चद्र भूषण सिंह उर्फ मुन्नू बाबू को उतारा है। ताकि जिले का ठाकुर मतदाता दोनों लोकसभा सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों को अपना खुला समर्थन दे सकें। इसी तरह लोधी समाज का एक मुश्त समर्थन प्राप्त करने के लिए स्वामी साक्षी जी महाराज को फर्रुखाबाद लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा है। भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं ने यह गठित बनाया है कि लोकसभा कन्नौज से लोधी समाज चन्द्र भूषण सिंह को एक मुश्त समर्थन देगा। अगर लोधी समाज ठाकुर प्रत्याशी श्री सिंह को अपना समर्थन नहीं देता है तो फर्रुखाबाद सीट से लोधी समाज के प्रत्याशी साक्षी जी महाराज को क्षत्रिाय मतदाताओं का समर्थन नहीं मिलेगा। इसलिए ठाकुरों और लोधियों की मजबूरी है कि भाजपा सूत्रों के अनुसार ब्राहमण, वैश्य,क्षत्रिय लोधी, शाक्य सहित अन्य पिछड़ी जातियों का भाजपा को पूर्ण समर्थन मिलेगा।
जिले का प्रत्येक राजनीतिक दल जातिगत आाधार पर अपने प्रत्याशियों को चुनाव लड़वाना चाहता है क्योंकि जिले की फर्रुखाबाद लोकसभा सीट के अन्तर्गत फर्रुखाबाद से 20 हजार लोधी, 34 हजार क्षत्रिय, 30 हजार शाक्य, 10 हजार अहीर, 10 हजार कुर्मी, 24 हजार मुसलमान, 5 हजार पाल, 24 हजार ब्राहमण, 45 हजार अनुसूचित जाति, 10 हजार वैश्य, 20 हजार कायस्थ व अन्य मिलाकर फर्रुखाबाद विधानसभा में कुल मतदाताओं की संख्या दो लाख पैंतीस हजार के लगभग है। इसी प्रकार मतदाताओं की जातिगत स्थिति के अनुसार कमालगंज में 60 हजार लोधी, 25 हजार क्षत्रिय, 10 हजार शाक्य, 10 हजार अहीर, 10 हजार कुर्मी, 50 हजार मुसलमान, 10 हजार पाल, 5 हजार ब्राहमण, अनुसूचित जाति 45 हजार, वैश्य समाज के पांच हजार, कायस्थ एवं अन्य जातियों के मतदाताओं की संख्या मात्र पांच हजार है। इस प्रकार कुल मिलाकर कमालगंज विधानसभा में विभिन्न जातियों की संख्या कुल मिलाकर लगभग दो लाख है।
कायमगंज विधानसभा सीट से विभिन्न जातियों की स्थिति में पच्चीस हजार लोधी, दस हजार क्षत्रिय, 25 हजार शाक्य, बीस हजार अहीर, पचास हजार कुर्मी, पचास हजार मुसलमान, पांच हजार पाल, दस हजार ब्राहमण, 40 हजार अनुसूचित जाति, पांच हजार वैश्य, पांच हजार कायस्थ व अन्य लोग शामिल हैं।इस प्रकार विभिन्न जातियों को मिलाकर इस विधानसभा क्षेत्रा में मतदाताओं की संख्या लगभग दो लाख पचपन हजार है। इसी प्रकार मौहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्र में लोधी मतदाता 20 हजार, क्षत्रिय मतदाता पचपन हजार, शाक्य मतदाता 10 हजार, अहीर साठ हजार, कुर्मी दस हजार, मुसलमान दस हजार, पाल समाज के पन्द्रह हजार, ब्राहमण समाज के मतदाता पांच हजार,पांच हजार वैश्य, कायस्थ व अन्य जातियों के मतदाताओं की संख्या पांच हजार है। इस विधानसभा क्षेत्रा में कुल मिलाकर मतदाताओं की संख्या दो लाख पैंतालीस हजार है।
वैसे तो भोगांव जिला मैनपुरी के अन्तर्गत आता है तथा विधानसभा क्षेत्र भी मैनपुरी में आता है। लेकिन यह क्षेत्र फर्रूखाबाद लोकसभा सीट का सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र है। जातिगत आधार पर इस क्षेत्रा में लोधी मतदाता साठ हजार, क्षत्रिाय 40 हजार, शाक्य 40 हजार, अहीर पन्द्रह हजार, कुर्मी दो सौ, मुसलमान 20 हजार, पाल समाज पांच हजार, वैश्य पांच हजार, कायस्थ व अन्य जातियों को मिलाकर कुल मतदाताओं की संख्या लगभग दो लाख पैंतालीस हजार है।
लोकसभा सीट फर्रुखाबाद में जातिगत मतदाताओं की संख्या के बारे में किए गए सर्वेक्षण से पता चलता है कि इस लोकसभा सीट के अन्तर्गत सबसे ज्यादा मतदाता दो लाख तीस हजार अनुसूचित जाति के हैं। इसी प्रकार लोधी समाज के मतदाताओं की संख्या एक लाख पिचानवे हजार है, जो मतदाताओं की संख्या में नम्बर दो पर आती है। क्षत्रिाय मतदाताओं की संख्या एक लाख पैसठ हजार है, जो नम्बर तीन पर है। चौथे नम्बर पर मुसलमान मतदाताओं की संख्या है एक लाख पचपन हजार है। यादव और कुर्मी समाज के मतदाताओं की संख्या बराबर होने के कारण इन दोनों मतदाताओं की स्थिति नम्बर पांच पर आती है। क्योंकि शाक्य मतदाताओं की संख्या एक लाख पांच हजार है और इतनी ही यादव समुदाय के मतदाताओं की संख्या है। कुर्मी समाज के मतदाताओं की संख्या 80 हजार होने से ये नम्बर छह पर आती है।
राजनीति में शुरू से अग्रणी भूमिका अदा करने वाले ब्राह्मण समाज के मतदाताओं की संख्या पच्चहत्तर हजार है। जो जनसंख्या के आधार पर नम्बर सात पर आती है। पाल समाज के मतदाताओं की संख्या लगभग पैंतीस हजार है जो नम्बर नौ पर आती है। कायस्थों के साथ अन्य जातियों की संख्या मिलाने पर इस वर्ग के मतदाताओं की संख्या कुल मिलाकर चालीस हजार होती है जोकि नम्बर दस पर आती है। इस प्रकार फर्रुखाबाद लोकसभा सीट से सांसद को जिताकर संसद में भेजने वाले साढ़े बारह लाख मतदाताओं का भिन्न-भिन्न राजनैतिक दलों की तरफ रुझान होने के कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि मतदाता किसे विजय दिलवाएंगे।
लोकसभा चुनाव में जद के पूर्व सांसद एवं बसपा से वर्तमान प्रत्याशी संतोष भारतीय के चुनाव मैदान में उतरने से राजनीति के सभी समीकरण गड़बड़ा गये हैं। वहीं राजनैतिक दलों के नेताओं की नींद उड़ गयी है। संतोष भारतीय के चुनाव मैदान में उतरने से लोकसभा क्षेत्र के विघटित क्षत्रियों ने एकत्र होकर श्री भारतीय को विजय श्री दिलाने का निर्णय ने लिया है। वैसे अभी तक कोई भी प्रत्याशी यह दावा नहीं कर सकता कि जीत उसी की होगी।
सपा एवं जद के गठबंधन के विपरीत संतोष भारतीय ने बसपा से टिकट लेकर यह साबित कर दिया है कि संतोष भारतीय को लोकसभा सीट से असीमित स्नेह है क्योंकि श्री भारतीय ने अपना राजनैतिक जीवन लोकसभा सीट फर्रुखाबाद से सन् 89 में विश्वनाथ प्रताप सिंह के नेतृतव में प्रारंभ किया था। पूर्व प्रधानमंत्री श्री सिंह का बरदहस्त प्राप्त करने के बाद श्री भारतीय ने सन् 89 में अपने सभी प्रत्याशियों को परास्त करके विजय प्राप्त की थी। ज्ञातव्य है कि यह चुनाव बोफोर्स मुद्दें को लेकर राजीव गांधी बनाम विश्वनाथ प्रताप सिंह के नाम पर लड़ा जाने वाला चुनाव श्री भारतीय ने जीतकर गत चुनावों में सारे समीकरण धवस्त करके विजय प्राप्त की थी। श्री भारतीय ने जद के नेतृत्व में चुनाव लड़कर सभी प्रत्याशियों को यह अहसास करा दिया था कि जिले की जनता किसी भी प्रत्याशी के राजनैतिक स्तर को नहीं बल्कि उसके व्यक्तिगत व्यवहार को देखती है। इसी व्यवहार को देखते हुए संतोष भारतीय को जिताया था। वही संतोष भारतीय तीसरी बार चुनाव लड़कर वह भी बसपा जैसी पार्टी से उम्मीदवार के रूप में जनता के सामने आकर इस बात का अहसास करा दिया है कि उन्हें लोकसभा सीट फर्रुखाबाद से चुनाव लड़ना है।
श्री भारतीय के समर्थकों का कहना है कि पूर्व सांसद संतोष भारतीय ने वाटलिंग प्लान्ट, एस.टी.डी. सुविधा, गैस प्लान्ट, आलू चिप्स औद्योगिक कार्यक्रमों को फर्रुखाबाद में लाने का श्रेय संतोष भारतीय को है। फिर भी लोकसभा सीट से चुनाव जीतना प्रत्येक प्रत्याशी के लिए टेढ़ी खीर होगी। कोई भी प्रत्याशी इस बात का दावा नहीं कर सकता कि विजय किसकी होगी।