देश की सेना क्या वाकई सैन्य साजो-सामान और हथियारों के संकट से जूझ रही है. सोशल मीडिया पर इन दिनों तेजी से एक खबर वायरल हो रही है कि हमारी सेना के जवानों को अब अपनी वर्दी और जूते भी अपने पैसों से खरीदने होंगे. सेना की इस तंगहाली पर क्या कोई दुखी होगा? सच्चाई […]

लोकसभा और विधानसभा उपचुनाव के परिणाम सामने आ गए हैं. अभी पिछले हफ्ते हमने चौथी दुनिया की लीड स्टोरी की थी, जिसकी हेडिंग थी जनता ही सबक सिखाएगी. हम ये तो नहीं कहते कि जनता ने सबक सिखा दिया, पर जनता ने सख्त चेतावनी अवश्य दे दी. चेतावनी सरकार के लिए ज्यादा है और विपक्ष […]

असम सहित उत्तर पूर्व के सातों राज्य इस समय एक बड़े आंदोलन के दरवाजे पर खड़े हैं. स्वयं असम के मुख्यमंत्री सोनोवाल भी आंदोलनकारियों के साथ खड़े नजर आ रहे हैं. आंदोलन केंद्र सरकार के एक फैसले को लेकर हो रहा है, जिसकी वजह से 1955 का नेशनल सिटीजनशिप एक्ट बदला जाने वाला है. 1971 […]

वक्त, नैतिकता, नियम-कानून कैसे बदलते हैं, इसका प्रमाण और इसका मनोविज्ञान आज हमारे सामने है. आजादी के बाद देश के जितने नेता हुए, चाहे वे किसी भी पार्टी के रहे हों, वे मानते थे कि राजनीति और राज लोकलाज से चलता है, संविधान से चलता है. लोकलाज एक मान्य शब्द था. संविधान की व्याख्या अलग-अलग […]

कर्नाटक चुनाव बीत गया. कर्नाटक का कोई भी असल मुद्दा किसी भी भाषण में न भारतीय जनता पार्टी ने उठाया और न कांग्रेस ने उठाया. एक कहानी खत्म हुई और यहीं से दूसरी कहानी शुरू होती है. दूसरी कहानी है राजस्थान की और मध्य प्रदेश की. अब राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में चुनाव का […]

अभी भी देश में ऐसे लोगों की बड़ी संख्या है, जो चुनाव में किस पार्टी ने क्या किया और कौन सी पार्टी क्या करने वाली है, ये जानने में रुचि रखते हैं. दरअसल ये ऐसे लोग हैं, जिनके दिमाग पर अभी भी सिद्धांतों का, वादों का और ईमानदारी का बोझ दिखाई देता है. दूसरी तरफ, […]

कर्नाटक का चुनाव भी देश के लिए एक नई सीख लेकर आने वाला है. लगभग सभी लोग मान रहे थे कि इस बार कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी अपनी सरकार बना सकती है. लेकिन पहली बार भारतीय जनता पार्टी को कर्नाटक में लिंगायत समाज के लिए आरक्षण को लेकर ऐसे सवालों का सामना करना पड़ा […]

हमारे देश में सामान्य आदमी की संवेदना मरी हुई प्रतीत हो रही है, खासकर तब, जब वो खुद को धर्म के दायरे में रखकर देख रहा है. छह साल या आठ साल की बच्चियों के साथ बलात्कार संवेदनशील युवकों द्वारा किया जाए, यह कभी कल्पना से परे था. यदा-कदा ऐसी घटनाएं होती थीं. लेकिन पिछले […]

देवेंद्र फड़णवीस ने अन्ना को तैयार किया कि अन्ना की मांगों को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय के राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह एक पत्र लिखेंगे और एक ऐसा जवाब देंगे, ताकि अन्ना कह सकें कि हमारी बात सरकार ने मान ली और सरकार कह सके कि हमने उनकी एक भी बात नहीं मानी. रोजाना के कार्यक्रम के […]

अन्ना की एक व्यक्तिगत कमजोरी जरूर है कि अगर उनके सामने भीड़ नहीं होती है, तो वो बहुत ज्यादा जोश में नहीं आते हैं. मुंबई में जब उन्होंने अनशन किया था, तब मैदान खाली पड़ा था, इसलिए अन्ना ने बीमार होने की बात कह कर चौथे दिन ही अनशन समाप्त कर दिया था. इस बार […]