फिरोज़ाबाद लोकसभा क्षेत्र के उपचुनाव के नतीजे ने धरतीपुत्र मुलायम सिंह यादव के क़दमों तले की ज़मीन सरका दी है. बहू डिंपल की शक्ल में ख़ुद सपा प्रमुख को मुंह की खानी प़डी. लेकिन, अभी कुछ ख़ास बिग़डा नहीं है, बल्कि यह तो एक संकेत और संदेश है कि चेत जाओ नेता जी, वरना आगे […]

आडवाणी बेहद अनुभवी राजनेता हैं. संघ  प्रमुख मोहन भागवत भी उनसे उम्र औरअनुभव में उन्नीस ही पड़ते हैं. शायद यही वजह है कि चौतरफा हमलों के बावजूद वह चुप्पी साधे हैं. वह केवल अपने सही व़क्त का इंतज़ार कर रहे हैं. मोहन भागवत चाहते हैं कि संघ का नियंत्रण एक बार फिर से भाजपा पर स्थापित हो […]

लोकसभा की लॉबी में गुलज़ारी लाल नंदा और आर आर मोरारका का सामना हुआ. नंदा जी ने आंखें चढ़ाते हुए मोरारका से कहा कि आप क्यों भारत सेवक समाज और भारत साधु समाज को परेशान कर रहे हैं,  इनके ख़िला़फ जांच करने का कोई मतलब नहीं है. इतिहास को देखने से दो सीखें तो ज़रूर […]

अरुण जेटली ने कभी सीधे और कभी टे़ढ़े ढंग से भाजपा के भीतर सफाई अभियान चलाया. इसका परिणाम यह निकला कि आज आडवाणी के बाद भाजपा में नरेंद्र मोदी और फिर अंतिम नेता अरुण जेटली ही दिखाई दे रहे हैं. भाजपा के बारे में हमें क्यों चिंता करनी चाहिए, यह सवाल है और इसका उत्तर […]

पिछले डेढ़ सौ सालों के इतिहास पर नज़र डालें, तो केवल छह केस अब तक  धारा 377 के तहत चले. इनमें से भी केवल एक में 1935 में अदालत ने सज़ा सुनाई. दरअसल जिस धारा के तहत डेढ़ सौ सालों में केवल एक सज़ा सुनाई गई है, उसे हटाने के लिए मचे हाय-तौबा की असली […]

यह इतिहास का वह पन्ना है, जिसके बारे में केवल चंद लोग जानते हैं। उनमें से दो अब इस दुनिया में नहीं हैं। इस पन्ने में 2004 में कांग्रेस की सरकार कैसे बनी, उसकी कहानी है। अब, जबकि पांच साल बाद 2009 में फिर से केंद्र में सरकार बनने जा रही है, तब यह आवश्यक […]

पिछले सालों में भारत में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे मशहूर रहे कांड का नाम बोफोर्स कांड है. इस कांड ने राजीव गांधी सरकार को दोबारा सत्ता में नहीं आने दिया. वी. पी. सिंह की सरकार इस केस को जल्दी नहीं सुलझा पाई और लोगों को लगा कि उन्होंने चुनाव में बोफोर्स का नाम केवल जीतने […]

कांग्रेस के अपने मंत्री भी स्वतंत्र प्रधानमंत्री की तरह व्यवहार करते थे. उस समय के गृह मंत्री शिवराज पाटिल, कांग्रेस के गृह मंत्री कम भाजपा के गृह मंत्री ज्यादा नज़र आते थे. उनके समय में पूरा पुलिस ढांचा, खुफिया ढांचा चरमरा गया था. कोई भी बड़ी घटना हो, वह राजनीतिक संत की तरह बयान देते […]